कारवॉं

नयी मंज़िल के मीरे-कारवाँ भी और होते हैं
पुराने ख़िज़्रे-रह बदले वो तर्ज़े-रहबरी बदला
-फ़िराक़ गोरखपुरी

बुधवार, 5 दिसंबर 2018

स्त्रियां पिकासो की - कुमार मुकुल

सिद्ध मनोविज्ञानी कार्ल युंग ने अपने एक लेख में पिकासो और उसकी कला को स्क्जिोफ्रेनिक कहा था। पिकासो के जीवन में और उसके चित्रों में आई दर्जन भर से ज्यादा स्त्रियों के साथ उसके व्यवहार को अगर देखा जाए तो युंग की बात सही लगती है। पर कलाकार यही तो करता है कि अपनी कमियों को एक चेहरा दे देता है जिससे वह खुद उसे पहचान पाता है उससे लड़ता है और इस तरह खुद को बचा लेता है। शायद पिकासो ने भी ऐसा ही किया।
उसके जीवन में छह घोषित प्रेमिकाएं थीं जिनमें से दो से उसने विवाह किया था। उसके लंबे जीवन में अक्सर एक साथ दो या तीन प्रेमिकाएं रहती थीं। यहां तक कि वह उनके आने जाने के लिए कई दरवाजे रखता था और किसे किस दरवाजे से आना है यह भी तय करता था। इसके लिए एक मित्र को वह हमेशा मुस्तैद रखता था।
उसके जीवन में आने वाली स्त्रियों में फ्रांसुआज, ओलिविए, ओल्गा, मारी तेरेज, डोरा मार, जैकलिन प्रमुख थीं। बेल फर्नांद, मादलेन, स्टाइन, नुश, इव्वा, युजेनिया आदि उसकी अन्य सहचरियां थीं। यह सब असामान्य नहीं था। नब्बे साल का लंबा जीवन जिया था पिकासो ने। और वह चित्रों के लिए मॉडलों का प्रयोग नहीं करता था। जीवन में आई स्त्रियों को ही वह मॉडल के रूप में प्रयोग करता था, या यूं कहें कि मॉडल के रूप में आई स्त्रियों के साथ वह टिककर रहने लगता था। चाहे वह वेश्या हो या किसी की पत्नी या उसके नाम से प्रभावित हो उसे देखने को उसके आस-पास मंडरती लड़कियां।
कुल मिलाकर अपनी प्रेमिकाओं के साथ उसका व्यवहार न्यायसंगत नहीं था। वह उनसे प्रेम नहीं करता था। और किसी स्त्री द्वारा छोड़ जाना उसे बर्दाशत नहीं होता था उसे वह किसी भी तरह अपने से बांèो रखना चाहता था। चित्रों में भी वह अधिकांश तौर पर उन्हें विकृत तौर पर चित्रित करता था। यूं कई सहज, सुंदर चित्र भी बनाए उसने। फर्ंनाद पिकासो की पहली जीवन सहचरी थी। वह पिकासो के जीवन का दरिद्रता का दौर था। सबमें उसने उसका साथ दिया। माधुरी पुरंदरे लिखती हैं - पाब्लो बड़ा शक्की था। कला और स्त्री दोनों के बारे में उसकी जिद विजेता होने की थी। मेरी स्त्री मुझे छोड़कर चली न जाए यह डर उसे हमेशा छेदता रहता था। फर्नांद को तो वह अकेले घर से बाहर नहीं ही जाने देता था, बाहर जाते समय उसको कमरे में तालाबंद कर जाता था। ये और ऐसी तमाम हरकतों के मूल में पिकासो के युवा काल की एक घटना के उसके मन पर पडे़ प्रभाव को देखा जा सकता है। वह थी उसके एक मित्रा काजागमास द्वारा प्यार में की गयी आत्महत्या। काजागमास ने नोंकझोंक में अपनी प्रेमिका जर्मेन पर गोली चला दी थी और उसे मरा समझ कर खुद को गोली मार लिया था। इसका उस पर गहरा असर पड़ा। उसने इसे कला में ढाल दिया। उससे संबंधित कई चित्र बनाये उसने। और जैसे खुद को चेतावनी दी कि इस तरह की मौत नहीं मरनी। फिर पिकासो की पहली प्रेमिका फनाद उसे छोड़कर किसी दूसरे चित्रकार के साथ घर छोड़कर चली गयी थी। इस तरह उसका शक्की व्यवहार और फिर उससे पैदा हुई इस तरह की परिणतियों ने उसे स्त्री के मामले में कठोर बना दिया। पिकासो नियमित वेश्याघरों को जाता था और वहां के जीवन का भी उस पर असर पड़ा। वहां उसने मात्र शारीरिक प्रेम को पाया और पैसे के व्यापार को। वह सोचता कि निष्कलुष प्रेम कैसे टिक सकता है। फिर चौदह साल की उम्र में ही जिस तरह उसने काम भावना प्रधान जीवन आरंभ किया था वह अंत तक चलता रहा। इस तरह प्रेम हमेशा उसे एक विभ्रम में डालता था। वह उसका उपयोग कला में खुद को निखारने में करता था। उसकी सृजन शक्ति का आधार वही था पर अपने इस आधार पर ही वह बराबर चोट करता था। उसके जीवन में आई हर स्त्राी ने उसकी कला को एक नया मुकाम दिया और सबातेज के हिसाब से उसके कला के हर कालखंड से जुड़ी स्त्रियों का नाम उसके काम के साथ जोड़ा जाना चाहिए। विध्‍वंस और सृजन जैसे एक साथ उसकी कला में चलते रहते थे। जिनसे वह प्रेम करता उन्हें ही रूलाता और फिर उस रुदन को भी चित्रिात करता। पिकासो के अनुसार चित्रकला विध्‍वंस का कुलजमा योग होती है। एक मनमौजीपन पिकासो में हमेशा रहा। मनोवैज्ञानिक मेडेल के अनुसार उसमें अमानवीय सा कुछ नहीं है उसने स्वध्‍याय तो काफी किया पर दिशाहीन। यह दिशाहीनता हमेशा उसके बात-व्यवहार में देखी जा सकती है। वह हमेशा अपने साथ एक रिवाल्वर रखता था। और आरंभ के दिनों में रात में जब तब फायर कर लोगों को चौंकाता था।
उसके जीवन में आयी स्त्रियों का पता लोगों को उसके चित्रों से लगता था। फिर उसकी नायिका उसके जीवन में अवतरित होती थी। जैसे ही किसी नयी नायिका का प्रवेश होता पुरानी उसके कैनवस से गायब होने लगती और जीवन से भी वह किनारे कर दी जाती। पिकासो की बनायी अिधकांश नंगी स्त्रियां कुरूप और राक्षसी-सी हैं। कभी उसने स्टाइन को कहा भी था कि प्रत्येक कला कुरूपता की घुट्टी पीकर ही जन्मती है। पिकासो की मित्र स्टाइन पता लगा पाती कि उसके कैनवस की नयी नायिका कौन है तब तक इव्वा का उसके जीवन में पदार्पण हो चुका था। इव्वा के साथ उसका जीवन सुंदर और सामान्य रहा। उसके आने से पिकासो बहुत खुश हुआ उसने रहने की जगह बदली और प्रेम से इव्वा के साथ रहने लगा। हर महत्‍वपूर्ण घटना के बाद पिकासो रहने की जगह बदल लेता था। बाद में इव्वा बीमारी से मर गई और पिकासो बहुत दुखी हुआ।विकृत व्यवहार के बाद भी स्त्रियां और सफलताएं हमेशा उसके साथ रहीं। हालांकि सफलता को वह खतरनाक मानता था पर अपनी अनदेखी उससे कभी बर्दास्त नहीं हुई। इव्वा के बाद उसके कैनवास पर आने वाली स्त्री थी युजेनिया। युजेनिया पिकासो की पुरानी मित्र स्टाइन को पिकासो से दूर करने में सफल हुई। इस दौरान पाकरेत और इरेन भी पिकासो की छाया के पीछे मडराती रहीं। पर अब पिकासो के जीवन में पहली ऐसी नायिका का प्रवेश होने वाला था जिसे उसकी पहली पत्नी का दर्जा मिलना था। वह थी ओल्गा। वह एक रूसी वैले में नर्तकी थी। वैले के लिए काम करते उससे प्रगाढ़ता हुई थी पिकासो की। पर इस बार उसके मित्र दियाघिलेव ने उसे चेतावनी दे दी थी कि रूसी लड़की के साथ विवाह करना पड़ता है। ओल्गा से उसने विवाह किया और फरवरी 1921 में उसे एक पुत्रा हुआ पावलो। अब मातृत्व उसके चित्र का विषय हो चुका था। पिकासो का कहना था कि जैसे लोग आत्मकथा लिखते हैं वैसे ही मैं चित्र बनाता हूं।बाद में ओल्गा के साथ पाब्लो का जीवन कष्टकर होता गया। अब उसके चित्रों में पहले सुंदरता का पर्याय बनी ओल्गा अब विकृत चेहरों के साथ आने लगी। एक कवि ब्रतों ने उसके बारे में कहा भी था - कि किसी चित्रकार ने स्त्री से इतना प्रेम नहीं किया होगा और उसकी इतनी अवहेलना भी नहीं की होगी। पाल एलुआर के अनुसार - वह असामान्य उत्कट प्रेम करता है और जिस बात से प्रेम करता है, उसी की हत्या भी कर देता है। पिकासो का खुद के बारे में कथन भी था - मेरे कहने पर यकीन मत करते जाना।मजेदार बात यह है कि पिकासो की मां की राय भी पिकासो के बारे में कुछ अच्छी नहीं थी। जब ओल्गा से उसका विवाह होने वाला था तो पिकासो की मां ने ओल्गा से कहा था कि - मेरे बेटे के साथ कोई भी स्त्री सुखी हो सकती है इस पर मुझे यकीन नहीं। वह सिर्फ अपने लिए है दूसरे के लिए नहीं।Þ
पिकासो से प्रेम करने वाली अिधकांश स्त्रियां धनी, अभिजात घराने से थीं वे उसे बहुत कुछ देने को तत्पर रहती थीं पर पिकासो केवल उस स्त्री को चुनता था। जब ओल्गा के साथ पिकासो की कलह होने लगी तो उसने मारी तेरेज को ढूंढ़ निकाला। मारी उसे बाजार में मिली थी और पिकासो को जंच गई थी उसने सीधे उसके कंधे पर हाथ रख कहा - तुम्हारा चेहरा खूबसूरत है, मुझे तुम्हारा चित्र बनाना अच्छा लगेगा। फिर छह महीने तक पिकासो उसके पीछे पड़ा रहा और अंत में मारी उसकी हो गई। पिकासो ने ओल्गा को तलाक देना चाहा पर वह तैयार नहीं हुई। उससे छिपाकर पिकासो मारी के साथ रहता रहा। मारी के साथ वह सबसे ज्यादा रहा पर ज्यादातर छिपा कर। जब पिकासो ने मारी के सामने उसका चित्र बनाने का प्रस्ताव सड़क पर पहली बार रखा था तब भी वह पिकासो के बारे में कुछ नहीं जानती थी, बाद में भी मारी ने उसके चित्रों के बारे में कहा - मुझे पिकासो के चित्रों में कुछ खास मालूम नहीं पड़ता। 1935 में मारी से पिकासो को एक पुत्र हुआ जिसका नाम पिकासो ने माया रखा। मारी ओल्गा से तलाक का इंतजार करती रही पर अंत तक वह नहीं हुआ।
मारी के बाद पिकासो के जीवन में फ्रांसुआज जिले का प्रवेश हुआ । उसकी प्रेमिकाओं में मात्र उसी ने पिकासो के खिलाफ आगे मोर्चा खोला और अंत तक लड़ती रही। जिले ने आहत हो उसके बारे में लिखा था - जिस प्रकार शिकारी अपने शिकार का सिर दीवानखाने में टांग देता है, वैसे ही पिकासो अपनी स्त्रिायों के सिर रख देता है। हां वे धड़ से पूरी तरह अलग नहीं हो पाते। उनमें थोड़ी जान देने का इंतजाम वह कर देता है।यूं अपने चित्रों में वह स्त्राी के खिलाफ होने वाले अत्याचारों पर भी जमकर कूची चलाता। 1933 के बाद उसके चित्राों में स्त्रियों पर जुल्म ढाते राक्षसी चाल चलने वाले सैनिक दिखाई पड़ने लगे। इस संदर्भ में पिकासो के कथन को ही देखा जाना चाहिए, वह कहता था - ßचित्राकला मुझसे शक्तिशाली है, वह जो चाहती है मुझसे करा लेती है। मैं कुछ बोलता नहीं पूरा, रंग देता हूं। मैं उस स्थिति तक पहुंचना चाहता हूं जहां कोई यह जानने का प्रयास नहीं करेगा कि मैंने अपना चित्र कैसे बनाया। इसकी क्या जरूरत है। मैं चाहता हूं कि अपने चित्रों को भावनाओं से मुक्त कर सकूं।Þ साफ है कि वह अपनी रचना प्रक्रिया को बाहर लाने से सप्रयास बचता था। इसके लिए ही वह परस्पर विरोधाभासी बयानेां का सहारा लेता था।पिकासो बहुआयामी प्रतिभा का था । चित्र बनाने के अलावे कविता, नाटक आदि भी लिखता। इससे उसकी मित्र स्टाइन नाराज होती कि वह उसके क्षेत्र में दखल दे रहा है। इस पर चिढ़ कर पिकासो कहता - ßतुम हमेशा मेरे बारे में कहती हो कि मैं एक असामान्य व्यक्ति हूं। फिर असामान्य मनुष्य जो चाहता है, वह कर सकता है।Þ इस पर स्टाइन चीखती - ßतुम असामान्य हो यही तुम्हारी सीमा है मुझसे यह मत कहलवाना कि वह काव्य हैÞ
यूं पिकासो का विश्वास कलाओं के परस्पर सामंजस्य में था। वह सोचता कि चित्र लिखा जाए और कविता उकेरी जाए। पिकासो की कविता के बारे में ब्रेतों ने कहा था - ßयह उतनी ही दृश्यात्मक है, जितना काव्यात्मक उसका चित्र।Þ आगे उन कविताओं ने उसे महान कवि पाल एलुआर का चित्र बनाया।
मारी तेरेज के बाद पिकासो के जीवन में आने वाली स्त्राी थी डोरा मार। वह मारी के विपरीत पिकासो की आंखों में आंखें डाल बाते कर पाती थी। डोरा पिकासो को एक कैफे में मिली थी और पहली ही मुलाकात में टेबल पर पडे़ चाकुओं को फेंकने का खेल करते अपने हाथों से खून निकाल लिया था उसने। और यह लाल रंग पिकासो की आंखों में बैठा तो फिर वह डोरा का हो गया। डोरा वामपंथी विचारों की थी और वामपंथी विचारों के कवि एलुवार की मित्र भी थी। डोरा और एलुआर के प्रभाव में ही पिकासो का खिंचाव वाम धारा की ओर हुआ था और बाद में लंबे समय तक पिकासो वामपंथी दल का सदस्य रहा था।
अपनी प्रेमिकाओं को उल्लू बनाने के उसके अपने नुस्खे थे। जैसे अपने प्रसिद्ध चित्र गुएिर्नका को दिखाते उसने मारी तेरेज को कहा कि चलो यह चित्र तेरा है। अगले ही क्षण ऐसे तात्कालिक बयानों से वह पलट जाता। यहां तक कि ओल्गा से वह तलाक इसलिए नहीं चाहता था कि इसके चलते उसे अपने चित्रों का भी बंटवारा करना पड़ेगा। पेरिस में लंबा समय बिताने वाला पिकासो स्पेन का था और स्त्रियों के प्रति उसके व्यवहार को लोग स्पेन के पारंपरिक स्त्री विरोधी आचरण से जोड़ कर देखते थे। उसकी ख्याति से खिंची औरतें उसकी ओर भागती चली आतीं और वह उन्हें अपने चारों ओर घुमाता रहता। इस तरह साठ साल की उम्र में पिकासो बीस साल के जोश से काम करता ओर वैसी ही बुभुक्षा को कायम किए रहता। उसकी प्रसिद्धी ऐसी थी कि लोग पेरिस में एफिल टावर के साथ पिकासो को देखने आते। पिकासो के चित्रों में स्त्रिायां अिधकतर बंद कमरों में दिखती हैं, भयानक पागलों जैसी कैदी स्त्रियां। यहां याद कीजिए पिकासो की पहली प्रेमिका से उसका व्यवहार, जिसे वह घर में ताला बंद कर बाहर जाता था। अथाह पैसा होने के बाद भी पिकासो कंजूस था। आने वाली लड़कियों के चित्र बना कर वह उन्हें दे देता। एक बार एक लड़की की नग्न तस्वीर बना उसने उसे भेंट किया। अब लड़की उस चित्र का क्या करती। उसे उसकी कीमत पता थी सो उसने उसे छुपा कर रख दिया। उसकी शादी हुई फिर तलाक हुआ तब उसने उस चित्र को बेचना चाहा तो उस पर पिकासो के हस्ताक्षर नहीं थे उसने पिकासो से उस पर हस्ताक्षर कराने चाहे तो उसने उसे अपना चित्र मानने से इनकार कर दिया।इधर उसकी उपेक्षा से डोरामार भी मानसिक तौर पर अवसाद ग्रस्त रहने लगी। उम्र के छियासठवें साल में पिकासो को फ्रांसुआज से एक पुत्र की प्राप्ति हुई। उसकी कनूनी पत्नी ओल्गा अब भी हर जगह उसका पीछा कर रही थी। फ्रंसुआज उससे चालीस साल छोटी थी। पिकासो की अगली स्त्री जैकलीन थी जो तलाकशुदा थी। वह फ्रांसुआज से कुछ छोटी ही थी। ओल्गा के अलावे जिस स्त्री की शांत, सौम्य तस्वीरें पिकासो ने बनाई है उनमें जैकलीन भी है। आगे उपेक्षा से त्रास्त फ्रांसुआज ने एक किताब लिखी - लाइफ विद पिकासो। यह वेस्टसेलर रही। इसमें पिकासो की पोलपट्टी खोलकर रख दी गयी थी। पिकासो ने इस पर केस भी किया पर पर मुकदमा हार गया। इसके बाद पिकासो ने फ्रांसुआज की संतानों के लिए अपने घर के दरवाजे बंद कर दिए।
उम्र के नब्बेवें साल में पिकासो ने फिर बहुत से चित्र बनाए स्त्रियों के जिसमें उसकी काम कुंठा उभर कर सामने आई। जैकलीन ने इन चित्रों को बाहर दिखाने से मना कर दिया था सो वे बंद रहे। अब जाकर वह मौत के बारे में सोचने लगा था हर दिन वह सोचता कि चलो एक दिन और मिल गया। आखिर आठ अप्रैल 1973 को पिकासो की मौत हो गयी। उसकी कब्र पर उसी का बनाया एक शिल्प लगाया गया। उसकी मृत्यु पर बहुत से अखबारों ने उसे एक क्रूर ,भावनाशून्य, कामांध व्यक्ति के रूप में याद किया। दिसंबर 1973 में उसकी 1909 की एक कृति द सीटिंग वूमन ने मूल्य के सारे रिकार्ड तोड़ दिए। मूल्य के सारे रिकार्ड पिकासो के प्रिय चित्रकार वॉन गॉग ने भी तोडे़ थे पर जीते जी नहीं, और उसके प्रतिमान पिकासो के उलट थे।
पुस्तक : पिकासो,
लेखिका : माधुरी पुरंदरे

सिद्धार्थ जोशी ने कहा… धन्‍यवाद, शायद इतना कहना पर्याप्‍त होता... मैंने पहली बार आपका ब्‍लॉग देखा है। इसमें मुझे प्रभावित किया। इसे मैं अपने फेवरेट में डाल रहा हूं। यकीन मानिए आपका हर लेख में नियमित रूप से पढूंगा। यह ब्‍लॉगिंग का एक अलग आयाम है। आपकी मेहनत और प्रस्‍तुतिकरण श्रेष्‍ठ है।

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