कारवॉं

नयी मंज़िल के मीरे-कारवाँ भी और होते हैं
पुराने ख़िज़्रे-रह बदले वो तर्ज़े-रहबरी बदला
-फ़िराक़ गोरखपुरी

गुरुवार, 30 अगस्त 2018

क्या, गोडसे रामायण पड़ता था ...

आपने ये डंबल क्‍यों रखे हैं

जी, फिटनेस के लिए 

कितने वजनी हैं ये
इनसे तो किसी को 
चोट पहुंचायी जा सकती है

मुगदर क्‍याें नहीं रखते
गदा भी रख सकते हैं
क्‍या आपको देश से, धर्म से प्‍यार नहीं 

फिटनेस के लिए योगा कीजिए
अपने मोदी जी भी करते हैं

मोदी जी तो ब्रह्मचारी हैं

इसमें क्‍या बुराई है

पर हिंदूराज के लिए 
ज्‍यादा बच्‍चे भी तो चाहिए

बच्‍चे वाले भी 
ब्रहमचारी हो सकते हैं
गांधी जी को देखिए
बच्‍चों के बाद आजीवन 
ब्रहृमचारी रहे

आप इतनी किताबें क्‍यों पढते हैं
अरे, आप तो गोडसे को भी पढते हैं

जी, एक हत्‍यारे के मानस को जानने के लिए

क्‍या, 
गोडसे रामायण (मानस) पढता था
तभी तो वैसा सज्‍जन था
पहले पांव छुए 
फिर सीने पर गोली दागी 

पांव छूकर मारने की तो पवित्र परंपरा है 
पांडवों ने भी द्रोण के पांव छुए थे तीरों से
फिर युधिष्ठिर ने 'अश्‍वत्‍थामा हतो...' किया था।

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