कारवॉं

नयी मंज़िल के मीरे-कारवाँ भी और होते हैं
पुराने ख़िज़्रे-रह बदले वो तर्ज़े-रहबरी बदला
-फ़िराक़ गोरखपुरी

गुरुवार, 14 सितंबर 2017

उत्‍तेजना-तनाव बाकी मोल-भाव - कुमार मुकुल

मोदी जी चुनाव जीतने के बाद भी चुनाव मे लगे हैं निरंतर। मिशन 2014, के बाद मिशन 2017, 2019, फिर 2025।  कोई काम ही नहीं है इनके पास, भाइयों लग जाइए मिशन में। मोदी लहर चल रही, दिल्‍ली में पिटे पर लहर चलती रही, बिहार में पिटे पर लहर चलती रही, जहां लहर का बहर नहीं सध रहा वहां मोल-भाव का कहर जारी है।
अदालत पूछ रही कि पांच साल के बीच जिन माननीयों की संपत्ति पांच सौ गनी हुई उसका हिसाब दीजिए पर मोदी जी तो मिशन में लगे हैं। अब इस सतत मिशनरी उत्‍तेजना-तनाव में स्‍वाभाविक है कि आम जनता भी भिड़ी हुई है उनके साथ।
चलो हम भी कुछ गोतस्‍करों से गायें लूट कर इसमें योगदान करें। गाय नहीं तो गधे सही, उन्‍हें ही लूट लाएं। ग तो लगा हे उसमें भी। तो इस उत्‍तेजनामय माहौल का असर हो रहा है आम जन पर। वह भी इस लहर मे डूबा लहर काटने में लगा है। उधर आपकी सरकारी गोशालाओं में हजारों गायें मर रहीं सड़ रहीं, उसका चारा भी खाए जा रहे सब।
अब इसका असर तो होना है। सब काम धाम रामभरोसे होने लगा है। फिर दिन में तीन बार एक ही लाइन पर ट्रेंनें पल्‍टी ना मारें तो और क्‍या हो। सारी जनता मानसिक अशांति में जीएगी तो आपकी बुलेट क्‍या चलेगी बैलगाडी के दिन आ जाएंगे आप  बनाते और काटते रहिए लहर। शिक्षा में आप दुनिया में पिछड गये। भूखमरी के इंडेक्‍स में पडोसियों से पीछे हैं। खुशी का मंत्रालय बना डाला पर उसके इंडेक्‍स में भी पीछे चले जा रहे।
कांग्रेस मुक्‍त बनाने से थक गये तो खरीद खरीद कर कांग्रेस युक्‍त करने का नया अभियान चला दिया। बस लहर चलनी चाहिए। मेक इन इंडिया के तहत असाल्‍ट राइफलें बनी पर आपकी सेना ने ही उसे बेकार साबित किया। बोफोर्स भी नहीं चली, पता चला उसके कल-पुर्जे चीन के थे।
कहीं कुछ हो हवा नहीं रहा। बस पूरा मुल्‍क हो हा हू ही किये जा रहा। इससे कुछ नहीं होने का। करते रहिए कूद-फांद। 

1 टिप्पणी:

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

@कहीं कुछ हो हवा नहीं रहा.....................किसी के आने-जाने से देश नहीं रुकता !! सकारात्मक सोचें, सिर्फ विरोध के लिए ही विरोध ना हो