कारवॉं

नयी मंज़िल के मीरे-कारवाँ भी और होते हैं
पुराने ख़िज़्रे-रह बदले वो तर्ज़े-रहबरी बदला
-फ़िराक़ गोरखपुरी

सोमवार, 8 सितंबर 2014

विकास बनाम शि‍गूफा



  मीडिया में उछल रहे भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह के हालिया वक्तव्य  पर,  कि यदि उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक तनाव जारी रहता है तो राज्य में अगली सरकार भाजपा की होगी , राजनीतिक हलकों में बवाल मचना स्वाभाविक है। आगामी चार विधानसभा चुनावों के मद्देनजर तमाम राजनीतिक दल अपने लिए नये शि‍गूफे तलाश रहे हैं, उछाल रहे हैं और उछल रहे शि‍गूफों पर टीका-टिप्पणी कर रहे हैं। विगत लोकसभा चुनावों में मिले बहुमत के बाद जिस तरह उत्तराखंड, बिहार आदि राज्यों में हुए उपचुनावों में मोदी का असर जाता हुआ दिख रहा है वह भाजपा को इस तरह के नये शि‍गूफे उछालने को मजबूर कर रहा है। हाल ही मुंबई दौरे पर गए अमित शाह ने स्वीकारा था कि मोदी लहर धीरे-धीरे कमजोर पड़ रही है, कि जनता की सोच समय-समय पर बदलती रहती है, कि वह पार्टी के चुनाव अभियान को पूरी तरह से नरेंद्र मोदी के करिश्मे पर केंद्रित न रखें बल्कि सत्तारूढ़ कांग्रेस-राकांपा के 15 सालों के कुशासन को जनता के सामने बेनकाब करें। इस संदर्भ में राकांपा नेता तारिक अनवर ने भी कहा कि 'विधानसभा उपचुनाव ने साबित कर दिया है कि भाजपा सिर्फ मोदी के नाम पर चुनाव नहीं जीत सकती, कि अगर धर्मनिरपेक्ष पार्टियां साथ आ जाएं तो सांप्रदायिक ताकतों को रोका जा सकता है।'
बिहार में जिस तरह से लालू-नीतिश के गंठजोड ने मोदी लहर को बेअसर कर दिया उसने एक ओर जहां बिखरे हुए विपक्ष को मिलकर लडने की प्रेरणा दी है वहीं उपचुनावों में अपने पिछडने से भाजपा का भी अपने विकास आदि के नारे पर विश्वास कमजोर पडा है नतीजतन फौरी तौर पर राजनीतिक लाभ के लिए सांप्रदायिकता का शि‍गूफा उछाल रही है। अब वे भाजपा और उसके सहयोगी दलों के नेता हों या सपा आदि दलों के , उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि इस तरह मतभेद और अफवाहें पैदा कर तात्कालिक लाभ चाहने वालें दलों को अंतत: जनता किनारे कर देती है।  
उत्तर प्रदेश में बढ रही हिंसा के संदर्भ में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आरोप लगाया है कि देश में साम्प्रदायिक झगड़ों के लिए भाजपा जिम्मेदार है और राजग शासन में 600 से अधिक साम्प्रदायिक घटनाएं हुई हैं। पर साम्प्रदायिक तनाव बढ़ने के लिए शाह उत्तर प्रदेश पुलिस केएक तरफा नजरियाको जिम्मेदार मानते हैं। उनका तर्क है कि, ‘महाराष्ट्र और हरियाणा में चुनाव होने जा रहे हैं। वहां साम्प्रदायिक तनाव क्यों नहीं है? केवल यूपी में क्यों है? ’ राममंदिर का मुद्दा उत्तरप्रदेश को आंदोलित करता है और इससे कौन इनकार कर सकता है कि मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद राममंदिर और साई बाबा आदि को लेकर बढ रहे विवादों पर भाजपा ने अब तक कोई सकारात्मक विचार या संदेश नहीं प्रस्तुत किए हैं, ऐसे में शाह के वक्तव्य की सांप्रदायिक व्याख्या सहज है। केंद्र को शासित करने वाली पार्टी के अध्यक्ष के तौर पर अब इस तरह के हल्के-फुल्के बयान जारी कर उससे निकलने के तर्क प्रस्तुत करना दीर्घकालीन राजनीति के लिए कहीं से उपयुक्त है।

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