हमारे कारवॉं को मंजिलों का इंतजार है , ये आंधियों , ये बिजलियों की पीठ पर सवार है , तू आ कदम मिला के चल , चलेंगे एक साथ हम , अगर कहीं है स्‍वर्ग तो उतार ला जमीन पर , तू जिन्‍दा है तो जिन्‍दगी की जीत में यकीन कर - शैलेंद्र

रविवार, 4 दिसम्बर 2011

रघुबीर सहाय को समर्पित कविता का कार्यक्रम - कविता प्रसंग


लिखावट
( कविता और विचार का मंच)
मित्रों ,
रघुवीर  सहाय आज होते तो नौ दिसम्बर को इस साल इक्कासी बरस के होते| रघवीर सहाय हमारे और आने वाले समय के बड़े कवि थे और एक बड़े मनुष्य भी थे|अपने समय के और अपने समय के बाद के कविओं पर उनकी कविता का असर माना ही जाता है| लिखावट प्रत्येक साल दिसम्बर के महीने में उनकी स्मृति में एक कार्यक्रम करता है| उसी परम्परा में इस साल भी एक कविता का कार्यक्रम लिखावट आयोजित कर रहा है|   
रघुबीर सहाय को समर्पित कविता का यह  कार्यक्रम  कविता प्रसंग   राजेंद्र प्रसाद अकादेमी के सहयोग से  साहित्यिक संस्था लिखावट १२ दिसम्बर२०११ को  २.३०  बजे शाम  से  राजेंद्र भवन के सभागर ( दूसरी मंजिल ,दीन दयाल उपाध्याय मार्गनई दिल्ली) में  आयोजित कर रहा है.  रघुबीर सहाय की कविताओं का पाठ (उनके कविता संग्रहों से) होगा तथा इस अवसर पर रघुबीर सहाय के बाद के बीस साल और  समकालीन कविता  विषय के माध्यम से  समकालीन कविता और रघुबीर सहाय पर अपने समय के अनेक कवि विचार करेंगे |   इस अवसर पर उन्नीस सौ अस्सी के बाद के दस कविओं का कविता पाठ भी होगा

Mithilesh Shrivastava

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