हमारे कारवॉं को मंजिलों का इंतजार है , ये आंधियों , ये बिजलियों की पीठ पर सवार है , तू आ कदम मिला के चल , चलेंगे एक साथ हम , अगर कहीं है स्‍वर्ग तो उतार ला जमीन पर , तू जिन्‍दा है तो जिन्‍दगी की जीत में यकीन कर - शैलेंद्र

रविवार, 17 जुलाई 2011

मैं मस्तमौला हूं - राजन कुमार

राजन बिहार की चर्चित नाट्य संस्था ‘हिरावल’ के रंगकर्मी हैं। वे एक अच्छे गायक भी हैं। पटना के सांस्कृतिक जगत में वे अलग  शख्सीयत हैं। वे कुछ गीतनुमा लिखते भी रहे हैं। पेश है उनका एक गीत-

मैं मस्तमौला हूं मस्ती में रहता हूं
दुनिया जो भी समझे मैं सच कहता हूं

खुदा-खुदा लोग बोले खुदा तो अंदर है
खुद को पहचान ले बंदे तू तो समुंदर है
दरिया की तरह बहता हूं
मैं मस्तमौला हूं मस्ती में रहता हूं

चलना है अपना काम सुबह हो या शाम
मेरा बस चले तो वक्त को लू मैं थाम
मेरा दिल जो कहे वही करता हूं
मैं मस्तमौला हूं मस्ती में रहता हूं

थोड़ी-सी खुशी की खातिर दूसरों को जो सताए
नादान वो है जो दूसरों को मूर्ख बनाए
मैं हर के दर्द को अपना समझता हूं
मैं मस्तमौला हूं मस्ती में रहता हूं

हंसना और रोना कैसा पाना और खोना कैसा
जिंदगी एक जंग है प्यारे इससे घबराना कैसा
कांटों को मैं फूल समझ के चलता हूं
मैं मस्तमौला हूं मस्ती में रहता हूं

कभी बन जाऊं सयाना कभी बन जाऊं मैं बच्चा
लोग मुझको समझे ये तो है अक्ल का कच्चा
दूल्हे की तरह मैं सजता-संवरता हूं
मैं मस्तमौला हूं मस्ती में रहता हूं

मैं मस्तमौला हूं मस्ती में रहता हूं
दुनिया जो समझे मैं सच कहता हूं

1 comments:

Vishaal Charchchit ने कहा…

एक मस्तमौला इंसान द्वारा मस्ती में लिखी गयी मस्त-मस्त रचना से मेरा दिल वाकई मस्त हो गया....राजन जी मस्त शुभकामना स्वीकार करें!!!

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