शनिवार, 5 मार्च 2011

हिन्दी के बलवाई - कबीरआँठ

निरूत्तराधुनिकता के बेपर बकता बबा बिभीखन पर एगो कोंचक बिषमबाद

ए बबुआ भुईंलोठन, आपन तिरकट नजरिय मार के तनी भाख कि आपन लंगडिस बबा बिभीखन बरबाद खबर में अबकी कवन पुरान नुसुखा भुडभुडाइल बाडन।

अजी धंधा ढूंढीस अचौरी बबा, पहिले त हमरा इ सबद लंगडिस के माने अझुराईं।

धत बुडबक , अतनो ना बुझलिस। अरे, उ निरूत्तराधुनिकता बर्बाद के बेपर बकता चिंदास बबा जब हिन्दी आ इंगलिस भाखा में समान अभाव से लंगडा के चलेले त उनका ढब आ धजा देख के हमार आतिमा बेलाजे भभीठ हो जाला।

ए बबा, रउओ का एतवारे - एतवारे अइसे भभीठ होखे के परण क लेले बानी। अबरियों बिभीखन बबा आपन बेरोजगार धरम के सपताहिक बरत निबहले बाडन। ए में पुरान का बा।

ए भुईंलोटन , तनी इ बिरतानत के अझुरा के समुझाव। जइसे आपन चिंदास बिभीखन बबा हर सपताह अझुरा अझुरा के आपन बकवास समुझावेले।

अरे का अझुराई ए बबा। अबरियो बबा बिभीषन आपन पुरान भरेठ दगले बाडन। माने समझ ल कि एहू बेरिया उ आपन कबीजीवा के लतिअवले बाडन।

कवन कबीजीवा के ए भुई लोटन। उनका त ना जिनका साल भर पहिरे आपन रूचिर किशोर बबा राज लतिअवले रहले।

हं बबा , उहे कबीजीवा के।

अरे भुईंलोटन, किशोरबबा के त गांधी आश्रम में स्थान परापत करे के रहे , उहे कबीजीवा के साथ, पर बबा बिभीखन कवन परमारथ कारने गरिअवलन हां, तनि ए पर अंधेर करीं।


ए भुईंलोटन, निरूत्तरआधुनिक युग में साधु सभे सवारथे कारण शरीर धरे ले। पर आपन बिभीखन बबा के कवन परमारथ अतिमा में बेआपल कि उ कबीजीवा के लतिआवे के इ धमाधम करम कइले, इ त उनकर देहिए जाने।

ए बबा, पहिले सभ बात अतिमा जानत रहे पर अब इ देहिया काहे अतना बेआपे लागल ,तनी इहो अझुराईं।

धत्त पगलेट, अपने गारद बबा बांच गइल बाडन नू कि निरूत्तर काल में अतिमा हिन्दी भाखा में रह जाई आ देहवा चिंदी भाखा में ......त क्षय हो चिंदास बबा बिभीखन के।

1 टिप्पणी:

ramji yadav ने कहा…

बाबा भिभिखन जब कुछ बोलिहान त लंका मे आगे लगावाट बाडन। राम-लछिमन सुकुमार बेचारे न समुंदर नपे मे न रावण भगावे मे ,उ त धनुस के भार से कायदे से सिया सिया भी न पुकार पावत रहलन ,उ त हनुमान एस रहल की समुंदर डाँक गाइलन और रसतवे मे बाबा बिभिखन के भेटा गईयलन, इहाँ से जवान कहानी चलअल उ लंका के बिनास पर जा के खतम भइल । ओ जमाने मे इहों उततेरआधुनिकता रहल । जाइसे आजकल आचौरी जी पुततराधुनिकता वाली बात करत बाटन,लागत हौ उहो कुलपताए चाहतारण का।