कारवॉं

नयी मंज़िल के मीरे-कारवाँ भी और होते हैं
पुराने ख़िज़्रे-रह बदले वो तर्ज़े-रहबरी बदला
-फ़िराक़ गोरखपुरी

गुरुवार, 14 जनवरी 2010

विगत यमुना - धर्मेंद्र सुशान्‍त


नदी का तट
विकट
सूना
कहीं नहीं कृष्‍ण

विगत
यमुना...