कारवॉं

नयी मंज़िल के मीरे-कारवाँ भी और होते हैं
पुराने ख़िज़्रे-रह बदले वो तर्ज़े-रहबरी बदला
-फ़िराक़ गोरखपुरी

गुरुवार, 14 मई 2009

शरीर - तू है तो आत्‍मा की जय जय है

तू है तो
वजूद है आत्‍मा का
उसकी
जय जय है

तू ना हो

तो कैसे कह पाएगा कोई
कि आत्‍मा
क्‍या शै है...

1 टिप्पणी:

संध्या आर्य ने कहा…

aapki chhoti kawitao se jo bhaaw nikal kar aati hai .......usake kya kahane meri to yahi duaa hai ki aap aise hi likate rahe....bahut hi utkrist rachana.