कारवॉं

नयी मंज़िल के मीरे-कारवाँ भी और होते हैं
पुराने ख़िज़्रे-रह बदले वो तर्ज़े-रहबरी बदला
-फ़िराक़ गोरखपुरी

मंगलवार, 28 अप्रैल 2009

तेरी यादों से

चाँद है
सितारे हैं
तेरी यादों से
ये सब
हारे हैं ।

2 टिप्‍पणियां:

संध्या आर्य ने कहा…

itani chhoti kavita .....wow our itani saree baate ..........kamaal ka to dete hi hai aap apani kawita se jabab nahi hai!

महामंत्री - तस्लीम ने कहा…

गागर में सागर भरने वाली कविता कही है आपने।

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SBAI TSALIIM