सोमवार, 23 मार्च 2009

चांदनी है सो है - गीत

चांदनी है सो है

तारों की कदमताल भी है

फिजां में घुलता सा

नाजनी तेरा खयाल भी है


चांदनी है ...

जगर-मगर है रौशन है

यह नगर यूं तो

सबके उपर छा...या
तेरा जमाल भी है


चांदनी है ...

जहां में कम है खुशी

तंज है गम जि या दा है

पर तबस्‍सुम है तेरा

जुल्‍फ है के जाल भी है


चांदनी है ...

2 टिप्‍पणियां:

mehek ने कहा…

chandani sa khubsurat geet bahut badhai

ओम आर्य ने कहा…

अचरज नहीं कि गंदले पानी में भी तू कमल कि तरह खिल ही जाती है. तेरे अस्तित्व को सलाम.