कारवॉं

नयी मंज़िल के मीरे-कारवाँ भी और होते हैं
पुराने ख़िज़्रे-रह बदले वो तर्ज़े-रहबरी बदला
-फ़िराक़ गोरखपुरी

शनिवार, 28 फ़रवरी 2009

मूर्तिकार सिवन की कलाकृतियां



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1 टिप्पणी:

अनिल कान्त : ने कहा…

मूर्तिकार प्रतिभा के बहुत धनी हैं ..... बहुत अच्छी रचना की है

मेरी कलम -मेरी अभिव्यक्ति