रविवार, 13 जुलाई 2008

हीरोइन से मुलाकात - 'ख' महाशय के किस्‍से - कुमार मुकुल


पुराना किस्सा है । तब 'ख' महाशय की हल्की भूरी मूछें उगनी आरंभी ही हुई थीं । जीवन की पहली प्रतियोगिता परीक्षा देकर वे बॉम्बे जनता से मुगल सराय लौट रहे थे । गाड़ी में लड़के भरे थे भागलपुर के कुछ बाद एक परिवार चढ़ा जिसमें एक खूबसूरत लड़की थी । उम्र होगी यही चौदह-पंद्रह 'ख' महाशय भी पंद्रह पार कर गए थे

'ख' महाशय ने लड़की को देखा तो सोचने लगे कि शायद लड़की बॉंम्बे जा रही है, हीरोइन बनने । सुंदर लड़की को बॉम्बे जनता में देखने के बाद इससे ज्यादा सोचने की कूबत अभी नहीं हुई थी 'ख' महाशय की ।

लड़की के भावी हीरोइन होने के ख्याल ने उनको थोड़ा सक्रिय कर दिया । उन्होंने लड़कों की भीड़ में उसके परिवार को उनकी आरक्षित सीटें दिलाने में मदद की । खुद उपर की सीट पर अब अपना बैग छोड़ नीचे आ बैठै
फिर सब नार्मल हो गया लड़की ने एक बार 'ख' महाशय से नीचे से पानी का बोतल मांगा तो लपककर `क´ ने बोतल दिया । उनका विचार पक्का हुआ कि इतनी खुली तो हीरोइन ही हुआ करती होंगी फिर शाम और रात होने लगी सभी खाने-पीने के बाद ऊंघने लगे ।

लड़की 'ख' महाशय के सिर के उपर वाली सीट पर लेट गई थी , गाड़ी बढ़ी जा रही थी अपनी समगति में । थोड़ी देर बाद 'ख' महाशय भी उंघने लगे, एक झपकी के बाद गाड़ी जब मोकामा पुल पार करने लगी तो 'ख' महाशय के चेहरे के आगे अचानक अंधेरा सा छा गया । दरअसल उपर सो रही लड़की की लंबी जुल्फें खुल कर नीचे लहराने लगी थीं ।

पहले तो 'ख' महाशय थोड़ा उजबुजाए फिर उन्हें बालों की महक अच्छी लगने लगी । आगे 'ख' महाशय ने सोचा कि बालों को समेट कर उपर कर दिया जाए । अखिर वे उठे और बालों को समेटने लगे । इतने कोमल मुलायम बाल उनकी कल्पना से बाहर थे । आखिर बालों को समेटने के बाद उन्‍होंने लड़की के हाथों को उठाकर बालों को उपर अटकाने की कोशिश की । इसमें लड़की की नींद उचटी और उसने अपना मुखड़ा घुमाकर उनकी ओर कर दिया ।

अब 'ख' महाशय खड़े थे सो खड़े रह गए । कोमल बालों की याद तलहथी से जा नहीं रही थी सो उन्होंने फिर से बालों में हाथ दे दिया और लगे संवारने । फिर उनके हाथ चेहरा सहलाने लगे । पूरा डब्बा एक लय-एक गति में डूबा उंघ रहा था ।

फिर 'ख' महाशय ने लड़की के ओठों केा छुआ ऊंगलियों से फिर कुछ हुआ कि उसके हाथ चूम लिए । फिर तो चुम्बनों की लड़ी लगा दी ।

आखिरी बार जब गाड़ी ने मुगलसराय लगने के पहले सीटी दी तो डब्बे के बाकी लड़कों के साथ 'ख' महाशय भी जगे । एक लड़के ने पीछे से हांक दी- उतरने का इरादा नहीं है क्या ? तब 'ख' महाशय ने पाया कि वे खड़े-खड़े लड़की के हाथों पर उंघ रहे हैं और उसके बाल उनके हाथों में हैं । उनका बैग । लड़की के सिरहाने था । अब लड़की को टुढ्डी से हिलाते हुए 'ख' महाशय ने बैग छोड़ने के लिए आवाज दी ।

लड़की आंखें मलती उठी और देखा कि 'ख' महाशय नीचे उतर रहे हैं । उतरते-उतरते 'ख' महाशय ने एक बार गरदन घुमा कर देखा-तो पाया कि लड़की मुस्कुराते हुए हाथ हिला रही है । 'ख' महाशय ने निश्‍चय किया कि लड़की जरूर हिरोइन बनने जा रही है वे सोचने लगे कि हिरोइन बनने के बाद वे उसे पहचानेंगे कैसे, उन्हें इतना तो याद आ रहा था कि लड़की मधुबाला जैसी सुंदर थी पर रात-अधेरा-नींद चेहरा कुछ साफ हो नहीं रहा था ।

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