कारवॉं

नयी मंज़िल के मीरे-कारवाँ भी और होते हैं
पुराने ख़िज़्रे-रह बदले वो तर्ज़े-रहबरी बदला
-फ़िराक़ गोरखपुरी

सोमवार, 19 मई 2008

आ रहा है विकास का रथ - लाल बहादुर ओझा

हर तरफ चल रहा है काम
हथौड़े बज रहे हैं
फर्श घिसी जा रही है
रामदीन बना रहे हैं मसाला छह एक का
बदल रहा है ईंटों का रंग
जमीन नया आकार ले रही है।
ऐसा होते हुए
किस्से याद आते हैं इस जमीन के
जिसमें लहलहाती थी फसलें, साल में चार दफे
वहां उस ढूहे पर थी अमराई, बीच में कई किस्म के गाछ­
नलकूप और भी बहुत कुछ
जिनसे छाया की तरह चिपके थे गांव के किस्से
काम चालू है
हथौड़े की मार से चकनाचूर हो रही हैं स्मृतियां
परत­ खुल रही हैं जमीन की
इसके कई रंग, कई अन्य रंगों के साथ अनगिनत प्रकृतियां बना रहे हैं
सुना आपने! किसी के चीखने की आवाज आ रही है
नहीं! चीख में घुल रही हैं कुछ और ध्वनियां
एंबुलेंस की आवाज है या पुलिस की पेट्रोल कार
कहीं कुछ हुआ है ... हुआ है कुछ
आवाजों का कहां तक पीछा किया जा सकता है भला
कई रूपों में तैर रहे हैं हमारे आस पास
अभी बाईं तरफ छाती के निचले हिस्से में झनझनाहट सी हुई है
मोबाइल घरघराया होगा- साइलेंट मोड था
लेकिन नहीं, मोबाइल नहीं है यह
कौन पुकार रहा है मुझे
किसकी ध्‍वनि मेरी धमनियों में धड़क रही है
अनजाना सा डर पसरा हुआ है नंदीग्राम में­
पता नहीं अगले पल क्या हो
कब कौन जांच समिति पहुंचे
कब कोई तालाशी दल
कब भाषण होने लगे पुलिया पर
और जुलूस में बदल जाएं लोग
कहीं भी हो सकती है मोर्चाबंदी
गूंज सकती हैं गोलियां
चीख और बारूद की गुत्थमगुत्थी संभव है किसी भी पल
थरा थरा रहा है गांव गांव
आ रहा है विकास रथ!
नहीं यहां कोई लोहा नहीं है
चिमनियों का धुआं नहीं उठा है प्रकाश में­
कोई रासायनिक गंध नही उतरी है हवा में­
लेकिन यह कैसी हलचल है
यह कैसा हौआ है
भय किसका है अपने गांव और अपने ही घर में­
कौन भयभीत कर रहा है हमें­ इस प्रजातांत्रिक देश में­?

2 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

सही है.

KUMAR NEELABH ने कहा…

JANAB IS DESH KO VIKAS RATH NAHI ...VIKASH JET PLAN KI JARURAT HI...KYO KI DESH KE NETA GAN IS JET KO BHI HATGARI BANA DALENGE ....OR DESH PHIR VIKASH RATH KA KUCH NAHI KAR PAYEGA..............