कारवॉं

नयी मंज़िल के मीरे-कारवाँ भी और होते हैं
पुराने ख़िज़्रे-रह बदले वो तर्ज़े-रहबरी बदला
-फ़िराक़ गोरखपुरी

सोमवार, 5 मई 2008

नारी तुम केवल श्रद्धा हो की आत्‍मा ... डायरी



रोजाना ... रोज की डायरी

माँ ... माँ .... अब बच्ची थोड़े न हूँ , ये गुरुर भी जाने कब पैदा हो गया था।
बारिश-लोग-अकेलापन-रात...
हट पागल
भूत थोड़े न कुछ है,

घड़ी ढाई बजा कर मुंह चिढ़ा रही थी !
प्यार हुआ -इकरार हुआ के गीत के बिना बेमतलब की बरसात !
कहा जाऊँ ?
किसी को तो नहीं जानती , इस शहर में!
मन की बात बार बार आकर चहरे पर चिपक जाती थी ! जितनी अकेली थी नहीं, उससे जयादा दिख रही थी ! ओह्ह !

चाय स्स्स्स्स्स्स्स्स की तीखी सीटी सी आवाज ने झपकी में भी हिला दिया

चाय के साथ मुफ्त घूरती आँखें ..नहीं कहने पर भी, नहीं पलटीं
बेंच -बारिश -चाय -रात् -लता मंगेशकर -रोमांस सबका गणित गड़बड़ा गया
झमाझम बारिश में लाठी की ठक-ठक ने बता दिया कि आज रात् मैडम स्टेशन पर अकेली नहीं
...कौन है रे साल्लाआआआअस्स्स्स्स्स्
रात् में भी साफ बेडौल दिखती तोंद और सरकारी आवाज़ ने राहत दी
दु:स्‍वप्‍न से छनकार आती ... बचाओ -बचाओ की आवाज़ मंद पड़ गई
.....जी वो उड़ान सीरियल की सर्फ़ वाली बहनजी ,किरण बेदी ...मुझे भी आई पीसी की सारी धाराएं याद हैं , राष्‍ट्रपति ‍अवार्ड , ओह गवर्नर अवार्ड, नहीं बेस्‍ट कैडेट
आय एम द बेस्‍ट कैडैट
मैं .... मैं भी पुलिस

सारी baat सूखे गले को तर करती हलक से होती पेट की तली में चली गयी, और अपनी गति से आंसू आंखों के किनारों में आ दुबके ।
कहां जाना है मैडम ...
अकेले क्‍यों चलती हो ... जमाना खराब है
सवाल ने नारी तुम केवल श्रद्धा हो की आत्‍मा को सि‍पाहियों के जूते की नोक से निकाल कर धीरे से मेरे दुपट्टे में सरका दिया
शादीशुदा ना होने के सारे प्रमाणों का विश्‍लेषण करके दोनों ने मेरे हिसाब से अश्‍लील और उनकी अपनी आदतों के अनुरूप प्रश्‍नों की झड़ी लगा दी ... व्‍वायफे्ंड साथ है ... घर से भागी हो क्‍या ...
अब इनका जवाब तो तब सूझे जब सवाल का मतलब पकड़ने की हिम्‍मत हो आपमें
धारा 376 रेप ... एसपीओ साब भी क्‍लास में पढ़ाते हुए सकुचाए थे और कमरे में जाकर पढ लेना कह खुद से कहकर पूरे अध्‍याय की इतिश्री कर दी थी। फिर मौका पाकर उन्‍होंने ट्रेनिंग कालेज की पॉलिटिक्‍स से अपनी नफरत .... खुद से बयां करने लगे ....
बाकी लड़कियां आएं कल फायरिंग में रामपुर जाना है , जाने क्‍या खाने में दे सो आज माया मैडम का जूडा देखा था पर अपने पूरे मन से आ गयी
धकड़-धकड़ आती पैसेंजर ने सिपाहियों को अपने करम-धरम की याद दिला दी और अपनी अतिरिक्‍त कृपा से मुझे बख्‍शते हुए वो पैसेंजर के नये यात्रियों पर पिल पड़े।
...सुबह के साथ धारा 376 हवा हो गयी , ऑटो के लिए आवाज देने के पहले ही चमत्‍कृत तरीके से आटो कुलांचे भरता सामने आ गया
पुलिस लाइन चलोगे
चलूंगा ... कितना होगा ...
सामान भी है ... तो फिर सौ रूपये
अरे रे पर रीता ने कहा था कि तीस रूपये होंगे वहां के
मैडम चलना है तो जल्‍दी बैठो , साले पुलिस वालों की वसूली का टाईम हो रहा है ।
ऑटो वाले की र्इमानदारी और पुलिस वाले की बेइमानी सूटकेस समेत उठाए चल पड़ी मैं

कोई टिप्पणी नहीं: