मंगलवार, 8 अप्रैल 2008

उपरवाले की बेआवाज लाठी

आज हिन्‍दुस्‍तान के एक चर्चित दैनिक में पहले पन्‍ने पर एक खबर है रेप के आरोपी पूर्व सिपाही की बेटी से बलात्‍कार । इस खबर में खबरची ने पीडिता के दर्द पर पीडिता के पिता के दर्द को तरजीह देते हुए चौदह साल की बच्‍ची के साथ हुए बलात्‍कार को उसके पिता के कूकर्म का फल बताया है। उनका तर्क है कि उपर वाले की लाठी में आवाज नहीं होती। और जैसे ईश्‍वर ने उसके कर्मों की सजा उसकी बेटी के बलात्‍कार के रूप में दिया। हैरत होती है कि आज की पत्रकारिता में भी ऐसी गर्हित और पिछड़ी सोच के लोग खबरें लिख रहे हैं। क्‍या खबरची बता सकता है कि जब उस सिपाही ने अन्‍यों के साथ किसी का सामूहिक बलात्‍कार किया था तब वह ईश्‍वर की बेआवाज लाठी क्‍या कर रही थी। या अगर ईश्‍वर उस समय यह देख रहा था तो उसे अब अपनी लाठी बजाने की जरूरत अचानक क्‍यों आन पड़ी। ऐसे में हर बलात्‍कार का तर्क उसके किसी संबंधी के गलत कार्यों में ढूंढ लिया जा सकता है।

1 टिप्पणी:

Arun Aditya ने कहा…

patrikarita men aese mahan logon ki bhari bhid hai. jo baap ke kukarm ki saja beti ko de, vo ishwar ki nahin kisi shaitan ki hi lathi ho sakti hai. aur ise ishwariya nyaya batane vale patrakar bandu ki samajh ke aage ham natmastak hi ho sakte hain.