मंगलवार, 13 नवंबर 2007

भोजपुरी गीत - कुमार मुकल

हमनी के देश काहे हो जाला राउर नेशन


हमनियों के हाथ-गोड़ बड़ुए रउए जइसन

काहे करींला फेन भेद-भाव अइसन


हमनी के बानी जा, एही से इ देश बा

कड़ी-कड़ी मूछ बा, आ बनल बनल बेश बा

हमनिए प टिकल बा राउर सब फैशन

कहे करींला रउआ भेद-भाव अइसन


खाट-खाटी बिनींला हमनी के राउर

छान-छप्‍पर छाईंला, देवार सबके चिनींला

तब काहे बइठब हमनी के बहरी

रहब जा काहे चउखट के बहरी

हमनी देश काहे हो जाला राउर नेशन
काहे करींला रउआ भेद-भाव अइसन।

2 टिप्‍पणियां:

Dr. RAMJI GIRI ने कहा…

"हमनी देश काहे हो जाला राउर नेशन
काहे करींला रउआ भेद-भाव अइसन।"

मुकुल जी,राऊर ई कविता त एकदमे लाज़वाब लागल हमरा के.देस आ नेसन के भेद पर ई व्यंग सटीक बैठ ता.

प्रभाकर पाण्डेय ने कहा…

बहुत बढ़िया लिखले बानी।
धन्यवाद।