शुक्रवार, 28 सितंबर 2007

नेपाल के राजा और हमारे भावी सम्राट - स्वाधीन कलम

कभी गोपाल सिंह नेपाली ने लिखा था -
तुझ सा लहरों में बह लेता
तो मैं भी सत्ता गह लेता

इमान बेचता चलता रे
मैं भी महलों में रह लेता

राज बैठे सिहासन पर
है ताजों पर आसीन कलम

मेरा धन है स्वाधीन कलम ।


दुनिया भले इक्कीसवीं सदी में चली गई हो पर हमारे पत्रकार बंधु अभी भी मध्‍ययुग में रह रहे हैं। तभी तो हिन्दी के सबसे बड़े अखबार में राहुल गांधी को लेकर खबर की हेडिंग में लिखा जाता है - कांग्रेस ने लिया अपने युवराज को सम्राट बनवाने का संकल्प। सम्राट इनवर्टेड कामा में है। जबकि पूरी खबर में सम्राट श्‍ब्द का जिक्र कहीं किसी संदर्भ्‍ में नहीं किया गया है। तय है कि यह काम डेस्क के किन्हीं उन्नत मष्तिष्‍क की उपज है। यह कितने श्‍र्म की बात है कि जिस समय नेपाल की करंसी से नरेश्‍ गायब हो रहे हैं उस समय हमारी पत्रकार विरादरी राहुल का सम्मान बढाने के लिए एक घिसे श्‍ब्द सम्राट का प्रयोग करती है। गुलामी हमारे जेहन से जा नहीं रही है इसके प्रमाण हमें रोज मिलते हैं।
जिस समय राहुल गांधी की हौसलाअफजाई के कसीदे कढ रहे थे उसी समय भाजपा भी वंशवाद की बेल बढाने में कांग्रेस से पीछे नहीं रहना चाह रही थी सो उसी समय राजनाथ सिंह अपने बेटै पंकज की ताजपोशी में लगे थे। हालांकि वंश्‍वाद का आरोप लगाते हुए कुछ भाजपा नेताओं ने इस पर आपत्ती कर दी और पंकज ने उत्तरप्रदेश्‍ भाजपा युवा मोर्चा के अध्‍यक्ष्‍ पद से मुक्ति की कामना की है।
किस्से कम नहीं हैं मीडिया में भी। रामगोपाल वर्मा के शोले अभी ठंडे ही पड़े हैं कि धरमेनदर जी ने शोले की नकल बनाने की ठान ली है। वो भी अपने और अमिताभ्‍ के बैटे को लेकर बनाएंगे फिल्म। सोचिए शोले बनाने वाले भी अपने बेटों को ही लेकर फिल्म बना लेते तो अपने ध्‍रम जी आज क्या करते।
हमारे चिर युवा देवानंद जी की जीवनी आई है 'रोमांसिंग विद लाइफ'। इसका लोकार्पण करते प्रधानमंत्री महोदय ने हिंदी सिनेमा को भारतीय जनमानस को जोड़ने वाला सबसे प्रभावी माध्‍यम बताया। उन्होंने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को विश्‍व की सफलतम फिल्म इंडस्ट्री कहा। पर हमारा दुर्भाग्य ही है कि जिस हिंदी की बदौलत यह सफलता हासिल हुई उसे बेचकर स्टार बनने वाले देवानंद जी ने अपनी जीवनी अंग्रेजी में लिखी। भईया रोमांस तो यूं ही हिंदी में चल गया है अब यह रोमांसिंग क्या ध्‍माल है। मजेदार है कि इसी समय हमारे धाकड़ क्रिकेटियर धोनी को हिंदी की याद आई और उन्होंने कहा कि वे हिंदी में बोलेंगे और वो बोले। चलिए किसी ने तो किरपा की हिंदी पर।

और अपने बुश्‍ माहोदय को भी तो कुछ कुछ करना होता है। सो उन्होंने फरमाया कि संयुक्त राष्‍ट्र में सदस्यता का हकदार भारत से ज्यादा जापान है। बुश्‍ की बातें सुनकर तो अपनी हिंदी फिल्म का वह गाना याद आता है - वो गोरे गोरे से छोरे वो .......। आखिर भारत को गोरेपन की क्रीम और मलनी होगी सालों तब जाकर ही इस ब्यूटी कांटेस्ट में वो पार पा सकेगा।
महान नेता महान खिलाड़ी महान देश्‍ ये हमारे मुहावरे हैं। अपने धोनी ने ये मारा वो मारा पर अपने नवजोत हैं कि उन्हें अपनी जोत के सामने कुछ साफ दिखता ही नहीं। वे तो बस सचिन सौरव द्रविड़ की महानता के गीत गा रहे हैं। अरे झारख्‍ंड दी पुत्तर में क्या कमी है भाया। फिर अपने कपिलदेव के रहते महानता के प्रतिमान कैसे ख्‍ड़े कर लेते हो सिद्ध्‍ू भाया। महानता के इस टंटे को देख्‍ते इरफान भाई के सस्ते श्‍ेर के लिए लिखा गया किसी का सियार याद आता है - मूर्ख्‍ताएं महान होती हैं एक उज्जड देश की शान होती हैं।

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